Friday, February 6, 2009

माँ-पापा की शादी की सैन्तीस्वीं वर्षगाँठ के अवसर पर लिखित, प्रेषित और प्रशंशित

मीठी-सी नोकझोंक से भरे रिश्ते की डोर,
जो है विश्वास,
प्रेम और सहयोग से जुड़ी,
बनी जो नए रिश्तों,
नई पीढ़ी को जन्म देने की कड़ी|

है उस विशेष दिन की आज सैन्तीस्वीं वर्षगाँठ,
बनाई जिसने पुत्र-पुत्री, वधू -दामाद, नाती-पोतों की लड़ी ,
सलामत रहे सदा ये जोड़ी,
मेरे पूज्य माँ-पापा को बधाई हो हर घड़ी |

'माँ' की कृपा से हों आप यूँ सुखी,
अटल, अजर, अविरल, चिरंजीवी हो आपकी छत्रछाया
जो हम पर है पड़ी,
बनी रहे सभी पर हर घड़ी |

मैं धन्य हुआ जो आप माँ-बाप से
उत्पत्ति मुझे मिली,
बारम्बार परमेश्वर से प्रार्थना है
आपकी प्रीत रहे जुड़ी |

आपके स्नेह, ममत्व और संबल की की ये भेंट,
जीवन पर्यंत देगी हमें हर संकट से ओट,
आशीर्वाद आपका हम सभी पर रहे बरकरार ,
इतनी सी बस अरज है परमेश्वर से आज|
इतनी सी बस अरज है परमेश्वर से आज||

4 comments:

  1. हिन्दी को अंतरजाल पर समृद्ध करने के लिए आपका यह प्रयास अति सराहनीय है. आपका स्वागत है. नियमित लेखन के लिए शुभकामनाऐं.

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  2. बहुत सुंदर…आपके इस सुंदर से चिटठे के साथ आपका ब्‍लाग जगत में स्‍वागत है…..आशा है , आप अपनी प्रतिभा से हिन्‍दी चिटठा जगत को समृद्ध करने और हिन्‍दी पाठको को ज्ञान बांटने के साथ साथ खुद भी सफलता प्राप्‍त करेंगे …..हमारी शुभकामनाएं आपके साथ हैं।

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  3. सुंदर रचना
    भावों की अभिव्यक्ति मन को सुकुन पहुंचाती है।
    लिखते रहि‌ए लिखने वालों की मंज़िल यही है ।
    कविता,गज़ल और शेर के लि‌ए मेरे ब्लोग पर स्वागत है ।
    मेरे द्वारा संपादित पत्रिका देखें
    www.zindagilive08.blogspot.com
    आर्ट के लि‌ए देखें
    www.chitrasansar.blogspot.com

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